Monday, 27 April 2015

रामेश्‍वरम...

रामेश्‍वरम, तमिलनाडू राज्‍य में स्थित एक शांत शहर है और यह करामाती पबंन द्वीप का हिस्‍सा है। यह शहर पंबन चैनल के माध्‍यम से देश के अन्‍य हिस्‍सों से जुड़ा हुआ है। रामेश्‍वरम, श्री लंका के मन्‍नार द्वीप से 1403 किमी. की दूरी पर स्थित है। रामेश्‍वरम को हिंदूओं के सबसे पवित्र स्‍थानों में से एक माना जाता है, इसे चार धाम की यात्राओं में से एक स्‍थल माना जाता है।

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                   किंवदंतियों के अनुसार, भगवान राम, भगवान विष्‍णु के सातवें अवतार थे जिन्‍होने यहां अपनी पत्‍नी सीता को रावण के चंगुल से बचाने के लिए यहां से श्री लंका तक के लिए एक पुल का निर्माण किया था। वास्‍तव में, रामेश्‍वर का अर्थ होता है भगवान राम और इस स्‍थान का नाम, भगवान राम के नाम पर ही रखा गया। यहां स्थित प्रसिद्ध रामनाथस्‍वामी मंदिर, भगवान राम को समर्पित है। इस मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु यात्रा करने आते है और ईश्‍वर का आर्शीवाद लेते है।

ऐसा भी माना जाता है कि रामेश्‍वरम वह स्‍थान है जहां भगवान राम ने अपने सभी पापों का प्रायश्चित करने का निर्णय लिया। भगवान राम ने एक ब्राह्मण रावण को मारने के बाद इसी स्‍थान पर तपस्‍या करने की इच्‍छा जताई थी। भगवान राम यहां, एक बड़ी सी शिवलिंग का निर्माण करना चाहते थे और इसके लिए उन्‍होने हनुमान जी से हिमालय से लिंग लाने को कहा था। ऐसा माना जाता है श्री रामनाथस्‍वामी मंदिर में स्थित मूर्ति वही मूर्ति है।

रामेश्‍वरम का ऐतिहासिक महत्‍व


रामेश्‍वरम का भारत के इतिहास में एक महत्‍वपूर्ण स्‍थान है जो अन्‍य देशों के साथ व्‍यापार से भी जुड़ा हुआ है। जो लोग श्रीलंका से सीलोन की यात्रा पर जाते है उनके लिए रामेश्‍वरम एक स्‍टॉप गैप प्‍वाइंट है। वास्‍तव में, जाफना साम्राज्‍य का इस शहर पर नियंत्रण रहा है और जाफना के शाही घराने को रामेश्‍वरम का संरक्षक माना गया है।

दिल्‍ली का खिजली वंश भी रामेश्‍वरम के इतिहास के साथ जुड़ा हुआ है। अलाउद्दीन खिजली की सेना के जनरल इस शहर में आए थे और पांड्यान्‍स की सेना भी उन्‍हे नहीं रोक पाई थी। उनके आगमन के अवसर पर, जनरल ने रामेश्‍वरम में आलिया - अल - दीन खालदीजी मस्जिद का निर्माण करवाया था।

16 वीं शताब्‍दी में, यह शहर विजयनगर के राजाओं के नियंत्रण में आ गया था और 1795 तक रामेश्‍वरम पर ब्रिटिश ईस्‍ट इंडिया कम्‍पनी ने आधिपत्‍य जमा लिया था। रामेश्‍वरम की इमारतों की वास्‍तुकला में आज भी स्‍थानीय रंग को आसानी से देखा जा सकता है।

रामेश्‍वरम और उसके आसपास स्थित पर्यटन स्‍थल

रामेश्‍वरम में भारी संख्‍या में मंदिर स्थित है जो भगवान राम और भगवान शिव को समर्पित है। यहां बड़ी संख्‍या में तीर्थयात्री आते है। हर साल देश - दुनिया के कोने - कोने से हिंदू धर्म के लोग यहां मोक्ष पाने के लिए पूजा - अर्चना करते है। उनके लिए जीवन में एक बार यहां आना जरूरी होता है।
रामेश्‍वरम में 64 तीर्थ या पवित्र जल के स्‍त्रोत है इनमें से 24 को अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण माना जाता है। माना जाता है कि इनमें डुबकी लगाकर नहाने से सारे पाप धुल जाते है। ऐसा माना जाता है कि अगर व्‍यक्ति के जीवन के सारे पाप धुल जाएं, तो उसे मोक्ष का रास्‍ता मिल जाता है। भारत की पंरपरा में किसी और तीर्थस्‍थान को इतना महत्‍वपूर्ण दर्जा अभी तक प्राप्‍त नहीं हुआ है। वास्‍तव में, रामेश्‍वरम के इन 24 कुंडों में स्‍नान करना अपने आप में एक तपस्‍या मानी जाती है।
रामेश्‍वरम में कई ऐसे धार्मिक स्‍थान है जिनका हिंदू धर्म में काफी महत्‍व है। यहां के 24 तीर्थ या कुंड सबसे अधिक प्रसिद्ध है।

रामेश्‍वरम कैसे पहुंचे

रामेश्‍वरम के लिए बहुत अच्‍छा नेटवर्क है। देश के कई हिस्‍सों के लिए यहां से रेल सुविधा उपलब्‍ध है। यहां का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट, मदुरई में स्थित है।

रामेश्‍वरम की यात्रा का सबसे अच्‍छा समय

रामेश्‍वरम में गर्मियों का मौसम काफी गर्म और सर्दियां सुखद होती है। सर्दियों के दौरान रामेश्‍वरम की सैर के लिए आएं।

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