Monday, 27 April 2015

कृष्ण और राधारानी

श्री कृष्ण कहते हैं - "जो तुम हो वही मैं हूँ हम दोनों में किंचित भी भेद नहीं हैं। जैसे दूध में श्‍वेतता, अग्नि में दाहशक्ति और पृथ्वी में गंध रहती हैं उसी प्रकार मैं सदा तुम्हारे स्वरूप में विराजमान रहता हूँ।" 


आधौ नाम तारिहै राधा। र के कहत रोग सब मिटिहैं, ध के कहत मिटै सब बाधा॥ राधा राधा नाम की महिमा, गावत वेद पुराण अगाधा। अलि किशोरी रटौ निरंतर, वेगहि लग जाय भाव समाधा॥  

ब्रज रज के प्राण श्री ब्रजराज कुमार की आत्मा श्री राधिका हैं। एक रूप में जहाँ श्री राधा श्री कृष्ण की आराधिका, उपासिका हैं वहीं दूसरे रूप में उनकी आराध्या एवं उपास्या भी हैं।

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